कोरोना महामारी:- शुभेन्दु भट्टाचार्य

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विश्व पटल पर भारत :-आज सारा विश्व कोरोना वायरस की विभीषिका से जूझ रहा है। सारे विश्व में जहां भय, अनिश्चितता का माहौल है, विश्व के अग्रणी देश जहां अनिर्णय की स्थिति में है, वहीं भारत, COVID- १९ के खिलाफ अपनी लड़ाई प्रतिबद्धता से लड़ रहा है। हमारे कोरोना योद्धा (पुलिसकर्मी, डॉक्टर, समाज सेवी, प्रशासन) इस लड़ाई में पूरे देशवासियों के प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। उनके इस अनिर्वचनीय कार्य को हम सभी भारतीय सलाम करते है।

संभावित आर्थिक मंदी, व्यापक बेरोजगारी, मांग- आपूर्तिका संकट जहाँसुरसा की तरह मुँह बाये खड़ी है। वहीं बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत के लिए संभावनाओं के द्वार भी खुल रहे हैं। कोबिड १९ सिर्फ एक महामारी नहीं है बल्कि एक युगांतकारी घटना है जो कि मानवमात्र के जीवन जीने के तौर तरीकों में अमूलचूल परिवर्तन करने का सामर्थ्य रखती है। COVID-१९ के संक्रमण ने जिस तरह से अमेरिका, इटली, स्पेन, इंगलैंड को प्रभावित किया है इससे एक नए वर्ल्ड ऑर्डर की संभावना व्यक्त की जा रही है। इसी प्रसंग के परिप्रेक्ष्य  मेंपाश्चात्य कवि टेनिसन के शब्दों में:

Old order changeth , yielding place to new,

God fulfills himself is many ways,

Lest, one good custom should corrupt the world.

(दुनिया मे ईश्वर नियम बदलता रहता है एक नियम से दुनिया नहीं चलती है)

भारत अपनी  बौध्दिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत के बल पर  एक बहुआयामी वैश्विक शक्ति के रुप में उभर सकता है? महान त्रासदियाँ कई बार महान सम्भावनाओं के द्वार भी खोलती है। इतिहास साक्षी है कि कैसे 1897 के नासिक प्लेग त्रासदी ने अंग्रेजों के खिलाफ़ जनमानस के असंतोष को हवादी। चापेकर बन्धुओं ने प्लेग कमिश्नर रैड और उसके सहयोगी ayerst की हत्या की। भारत मे क्रान्तिकारी आंदोलन का सूत्रपात वीर सावरकर के ‘मित्र मेला ‘ (अभिनव भारत) त्तथा बंगाल के क्रांतिकारी संगठनों के द्वारा हुआ था। ठीक वैसे ही 1666 ई० में लंदन के महान अग्निकांड ने बड़ी संख्या में ब्युबोनिकप्लेग के वाहक चूहों को मार दिया गया। भारत अपने अपार युवजन शक्ति के दमपर डेमोग्राफिक डिविडेंड का लाभ उठा सकता है। ऐसी संभावना व्यक्त की जा रही है कि आनेवाले समय में कोरोना वायरस से बर्बाद हुई आर्थिक व्यवस्थायें और संकीर्ण राष्ट्रवाद, प्रोटेक्शनिजम की तरफ झुकेगी। भारत अपने लोकतांत्रिक व्यवस्था, उदार जीवन मूल्यों और प्राचीन बौध्दिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं के वाहक के रूप में आशा की किरण बनेगा। भारत वसुधैव कुटुम्बकम के शक्तिशाली मानवीय सूत्र के व्दारा क़बाइली मानसिकता से जकड़े विश्व को नयी दिशा दे सकता है।

भारत ने U.N. के तत्वावधान में कई सद्भावना अभियान चलाया है। इसके साथ भारत, प्रवासी भारतीयो की तीक्ष्ण मेधा और एशियाई-अफ्रीकी देशों के स्वाधीनता संग्राम की प्ररेणा बनता रहा है। विश्व पटल पर उत्पन्न होने वाली संभावित नेतृत्व शून्यता को भरने का काम आनेवाले दिनों में भारत कर सकता है। ध्यातव्य है कि ट्रम्प के राष्ट्रपतित्व में अमेरिका विश्व  के आर्थिक, सामरिक और बौद्धिक नेतृत्व वाले संगठनों से धीरे-धीरे पीछे हट रहा है। पेरिस समझौते से हटना, WHO को आर्थिक सहायता को कम करना तथा तालिबान से समझौता, इसके कुछ प्रमाण है।

सर्वप्रथम भारत को कोरोना वायरस के खिलाफ निर्णायक विजय पानि होगी । वैज्ञानिक अन्तर्दृष्टि, शासनादेशों के पालन सामूहिक और देश के गरीब तबके के प्रति सकारात्मक सहयोगतथा सहायता के भाव से भारत इस विश्व महामारी पर जीत हासिल कर सकता है। अगर हम भारतवासी एक सामूहिक शक्ति के रूप ऐसा करने में सफल हुए, जोकि बिल्कुल होगें, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत विश्व बिरादरी में यथोचित स्थान प्राप्त करेगा और अपनी  प्राचीन अस्मिता को हासिल कर लेगा।

जय हिंद

शुभेन्दु भट्टाचार्य
प्रवक्ता-अग्रेंजी
जवाहर नवोदय विद्यालय, चंदौली