दैनिक राशिफल 2 सितम्बर 2020

आचार्य पँ० पुष्पेन्द्र कुमार द्विवेदी
ज्योतिष कर्म काण्ड एवं वास्तु विशेषज्ञ
संपर्क सूत्र 7800868289
9260981854
[email protected]


🌞 ~ *आज का हिन्दू पंचांग* ~ 🌞
⛅ *दिनांक 02 सितम्बर 2020*
⛅ *दिन – बुधवार*
⛅ *विक्रम संवत – 2077 (गुजरात – 2076)*
⛅ *शक संवत – 1942*
⛅ *अयन – दक्षिणायन*
⛅ *ऋतु – शरद*
⛅ *मास – भाद्रपद*
⛅ *पक्ष – शुक्ल*
⛅ *तिथि – पूर्णिमा सुबह 10:51 तक तत्पश्चात प्रतिपदा*
⛅ *नक्षत्र – शतभिषा शाम 06:34 तक तत्पश्चात पूर्व भाद्रपद*
⛅ *योग – सुकर्मा दोपहर 01:04 तक तत्पश्चात धृति*
⛅ *राहुकाल – दोपहर 12:26 से दोपहर 02:00 तक*
⛅ *सूर्योदय – 06:23*
⛅ *सूर्यास्त – 18:52*
⛅ *दिशाशूल – उत्तर दिशा में*
⛅ *व्रत पर्व विवरण -भाद्रपद पूर्णिमा, संन्यासी चातुर्मास समाप्त, प्रतिपदा का श्राद्ध*
💥 *विशेष – पूर्णिमा, श्राद्ध और व्रत के दिन ब्रह्मचर्य पालन करे तथा तिल का तेल खाना और लगाना निषिद्ध है।(ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंडः 27.29-38)*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *श्राद्ध विशेष* 🌷
🌞 *पूर्वजों को पितर पक्ष में इस मंत्र के द्वारा सूर्य भगवान को अर्ध्य देने से यमराज प्रसन्न होकर पूर्वजों को अच्छी जगह भेज देते हैं ।*
🌷 *ॐ धर्मराजाय नमः ।*
🌷 *ॐ महाकालाय नमः ।*
🌷 *ॐ म्रर्त्युमा नमः ।*
🌷 *ॐ दानवैन्द्र नमः ।*
🌷 *ॐ अनन्ताय नमः ।*
🌞 *~ हिन्दू पंचांग ~* 🌞

🌷 *पितृ पक्ष* 🌷
🙏🏻 *धर्म ग्रंथों के अनुसार, विधि-विधान पूर्वक श्राद्ध करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। वर्तमान समय में देखा जाए तो विधिपूर्वक श्राद्ध कर्म करने में धन की आवश्यकता होती है। पैसा न होने पर विधिपूर्वक श्राद्ध नहीं किया जा सकता। ऐसे में पितृ दोष होने से कई प्रकार की समस्याएं जीवन में बनी रहती हैं। पुराणों के अनुसार, ऐसी स्थिति में पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त कर कुछ साधारण उपाय करने से भी पितर तृप्त हो जाते हैं।*
➡ *न कर पाएं श्राद्ध तो करें इनमें से कोई 1 उपाय, नहीं होगा पितृ दोष*
🙏🏻 *जिस स्थान पर आप पीने का पानी रखते हैं, वहां रोज शाम को शुद्ध घी का दीपक लगाएं। इससे पितरों की कृपा आप पर हमेशा बनी रहेगी। इस बात का ध्यान रखें कि वहां जूठे बर्तन कभी न रखें।*
🙏🏻 *सर्व पितृ अमावस्या के दिन चावल के आटे के 5 पिंड बनाएं व इसे लाल कपड़े में लपेटकर नदी में बहा दें।*
🙏🏻 *गाय के गोबर से बने कंडे को जलाकर उस पर गूगल के साथ घी, जौ, तिल व चावल मिलाकर घर में धूप करें।*
🙏🏻 *विष्णु भगवान के किसी मंदिर में सफेद तिल के साथ कुछ दक्षिणा (रुपए) भी दान करें।*
🙏🏻 *कच्चे दूध, जौ, तिल व चावल मिलाकर नदी में बहा दें। ये उपाय सूर्योदय के समय करें तो अच्छा रहेगा।*
🙏🏻 *श्राद्ध में ब्राह्मण को भोजन कराएं या सामग्री जिसमें आटा, फल, गुड़, सब्जी और दक्षिणा दान करें।*
🙏🏻 *श्राद्ध नहीं कर सकते तो किसी नदी में काले तिल डालकर तर्पण करें। इससे भी पितृ दोष में कमी आती है।*
🙏🏻 *श्राद्ध पक्ष में किसी विद्वान ब्राह्मण को एक मुट्ठी काले तिल दान करने से पितृ प्रसन्न हो जाते हैं।*
🙏🏻 *श्राद्ध पक्ष में पितरों को याद कर गाय को हरा चारा खिला दें। इससे भी पितृ प्रसन्न व तृप्त हो जाते हैं।*
🙏🏻 *सूर्यदेव को अर्ध्य देकर प्रार्थना करें कि आप मेरे पितरों को श्राद्धयुक्त प्रणाम पहुँचाए और उन्हें तृप्त करें।*
पितृपक्ष में घर पर ही आसान तरीके से प्रसन्न कर सकते है

पितृपक्ष में आप गया, गोदावरी तट और प्रयाग में श्राद्ध- तर्पण नहीं कर सकते हैं तो घर पर रहकर भी पितरों को खुश कर सकते हैं।
श्राद्ध और तर्पण –

1 – श्राद्ध तिथि पर सूर्योदय से दिन के 12 बजकर 24 मिनट की अवधि के बीच ही श्राद्ध करें।

2 – इसके लिए सुबह उठकर नहाएं, उसके बाद पूरे घर की सफाई करें। घर में गंगाजल और गौमूत्र भी छीड़कें।

3 – दक्षिण दिशा में मुंह रखकर बांए पैर को मोड़कर, बांए घुटने को जमीन पर टीका कर बैठ जाएं। इसके बाद तांबे के चौड़े बर्तन में काले तिल, गाय का कच्चा दूध, गंगाजल और पानी डालें। उस जल को दोनों हाथों में भरकर सीधे हाथ के अंगूठे से उसी बर्तन में गिराएं। इस तरह 11 बार करते हुए पितरों का ध्यान करें।

4 – घर के आंगन में रंगोली बनाएं। महिलाएं शुद्ध होकर पितरों के लिए भोजन बनाएं। श्राद्ध के अधिकारी व्यक्ति यानी श्रेष्ठ ब्राह्मण को न्यौता देकर बुलाएं। ब्राह्मण को भोजन करवाएं और निमंत्रित ब्राह्मण के पैर धोने चाहिए। ऐसा करते समय पत्नी को दाहिनी तरफ होना चाहिए।

5 – पितरों के निमित्त अग्नि में गाय के दूध से बनी खीर अर्पण करें। ब्राह्मण भोजन से पहले पंचबलि यानी गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।

6 – दक्षिणाभिमुख (दक्षिण दिशा में मुंह रखकर) होकर कुश, जौ, तिल, चावल और जल लेकर संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं। इसके बाद भोजन थाली अथवा पत्ते पर ब्राह्मण हेतु भोजन परोसें।

7 – प्रसन्न होकर भोजन परोसें। भोजन के उपरांत यथाशक्ति दक्षिणा और अन्य सामग्री दान करें। इसमें गौ, भूमि, तिल, स्वर्ण, घी, वस्त्र, अनाज, गुड़, चांदी तथा नमक (जिसे महादान कहा गया है) का दान करें। इसके बाद निमंत्रित ब्राह्मण की चार बार प्रदक्षिणा कर आशीर्वाद लें। ब्राह्मण को चाहिए कि स्वस्तिवाचन तथा वैदिक पाठ करें तथा गृहस्थ एवं पितर के प्रति शुभकामनाएं व्यक्त करें।

8 – श्राद्ध में सफेद फूलों का ही उपयोग करें। श्राद्ध करने के लिए दूध, गंगाजल, शहद, सफेद कपड़े, अभिजित मुहूर्त और तिल मुख्य रूप से जरूरी है।
📖💐🙏🏻
श्राद्ध पक्ष 2020 की महत्वपूर्ण तिथियां
पूर्णिमा श्राद्ध- 2 सितंबर 2020
पंचमी श्राद्ध- 7 सितंबर 2020
एकादशी श्राद्ध- 13 सितंबर 2020
सर्वपितृ अमावस्या- 17 सितंबर 2020
पंचक

31 अगस्त मध्यरात्रि बाद 3.48 से 5 सितंबर मध्यरात्रि बाद 2.22 बजे तक

28 सितंबर 09:41 सुबह से 3 अक्तूबर 08:51 सुबह तक

एकादशी

इन्दिरा एकादशी – 13 सितंबर 2020

पद्मिनी एकादशी – 27 सितंबर 2020

परम एकादशी – 13 अक्टूबर 2020

पापांकुशा एकादशी – 27 अक्टूबर 2020

प्रदोष

रविवार, 30 अगस्त प्रदोष व्रत (शुक्ल)

15 सितंबर ( मंगलवार ) भौम प्रदोष व्रत ( कृष्ण )

29 सितंबर ( मंगलवार ) भौम प्रदोष व्रत ( शुक्ल )

14 अक्‍टूबर ( बुधवार ) प्रदोष व्रत ( कृष्ण )

28 अक्‍टूबर ( बुधवार ) प्रदोष व्रत ( शुक्ल

अमावस्या
गुरुवार, 17 सितंबर अश्विन अमावस्या
शुक्रवार, 16 अक्टूबर आश्विन अमावस्या (अधिक)

पूर्णिमा

बुधवार, 02 सितंबर भाद्रपद पूर्णिमा व्रत
गुरुवार, 01 अक्टूबर आश्विन पूर्णिमा व्रत (अधिक)
शनिवार, 31 अक्टूबर अश्विन पूर्णिमा व्रत