बरतन माजकर एवं पोछा करके जीवन व्यतीत करने वाली दर्जनों निरीह महिलायें राशन के लिये दर दर भटक रही हैं, उक्त असहायो को प्रबोधिनी फाउण्डेशन ने दिया राशन

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गैरजनपद से आये मजदूर परिवार जिनका राशन कार्ड बनारस में नहीं है , पति देहाडी मजदूरी और पत्नी घरों में बरतन पोछा करके जीवन व्यतीत करती है उनके सामने लाकडाऊन में पड़े दो जून की रोटी के लाले

मंडुवाडीह, शिवदासपुर एवं तुलसीपुर में सोमवार को दोपहर लगभग 12 बजे किराये के मकान में अन्य जनपदो से आकर जीविका के लिये रहने वाली दर्जनों महिलायें जो महमूरगंज के रईसों के घरों में बरतन माजती हैं एवं झाडू पोछा करती हैं और उनके पति शहर में देहाडी मजदूरी करते हैं, लेकिन कोरोना संक्रमण से लाकडाऊन के कारण कार्य छूट गया है । रइस परिवार जिनके यहाँ काम करके परिवार की जीविका औरते चलाती थीं कोरोना संक्रमण के कारण या बहाने अपने घर का दरवाजा बन्द कर लिये हैं किसी प्रकार का सहयोग नहीं कर रहे हैं ।पुरूष वर्ग की देहाडी मजदूरी भी बन्द हो गयी है जिसके कारण परिवार के सामने दो जून की रोटी का लाला पड़ गया है, बनारस का निवासी नहीं होने के कारण राशन कार्ड में इन निरीह लोगों का नाम नहीं है तथा गैरजनपद के होने के कारण मतदाता सूची में भी नाम नहीं है जिससे ग्राम प्रधान सहित अन्य जनप्रतिनिधि भी भाव नहीं दे रहे हैं, आज अचानक लगभग दर्जनों महिलाओं का झुण्ड प्रबोधिनी भवन शिवाजीनगर पर आ गया, इनकी वेदना सुनकर प्रबोधिनी फाउण्डेशन की उपाध्यक्ष श्वेता राय अपने घर के प्रयोग का राशन घर से लाकर तुरन्त महिलाओं को दिया और भरोसा दिलाया कि प्रशासन से बात करके राशन जल्द उपलब्ध कराऊगा या प्रशासन से अनुमति लेकर आप सबको भरपूर मात्रा में लाकडाऊन तक भोजन की समस्या न हो इसके लिये भरपूर राशन उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रबोधिनी फाउण्डेशन करेगी । समस्याग्रस्त महिलायें जिनका सहयोग किया गया और आगे सहयोग की आवश्यकता है निम्न हैं – मुन्नी विन्द, केसरी देवी पटेल, सुगना राजभर, चन्द्रावती देवी, रेखा राजभर, पिंकी गौड़, रेखा देवी गौड़, मल्लभ गौड़, माला विन्द, किस्मतीया राजभर, श्यामा देवी, सीमा गौड़, देवी गौड़, शीला पटेल, देवन्ती विन्द शामिल हैं ।

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