ब्लॉक कुठौंद में योगी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट स्थाई अस्थाई गौशालाओं में जिम्मेदारों द्वारा की जा रही है लापरवाहीं

 

कुठौद (जालौन) सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने पर यकायक शरद ऋतु में वृद्धि हो जाती है धनु राशि में 4 दिन के विचरण के बाद शीतलहर का प्रकोप भी शुरू हो जाता है जिसको दृष्टिगत रखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उत्तर प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट स्थाई अस्थाई गौशालाओं में बेहतर व्यवस्थाओं के लिए प्रशासन जहां दिन रात एक किए हुए हैं फिर भी कहीं-कहीं अभी भी ठंड से बचाव के इंतजाम पूरी तरह से बेहतर न होना आखिर क्या दर्शाता है। कहीं सर्दी में गोवंश काप रहे हैं तो कहीं खुले तिरपाल के नीचे ठिठुरने को बेजुबान मजबूर हो गया है। अव्यवस्थाओं को लेकर लगातार समाचार प्रकाशित किये जा रहे हैं फिर भी जिम्मेदारों के कानों पर जूं रेंगता नजर नहीं आ रहा है जिसके परिणाम स्वरुप ही ईंटों में बीते दिन पांच गौवंशजों को खुले में डालकर जो क्रूरता उनके साथ की गई वह अधिकारियों की सतय निष्ठा पर दर्जनों प्रश्न चिन्ह खड़े करती नजर आ रही है।गौ आश्रय स्थलों की बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर अधिकारियों के निर्देश सार्थक रूप धारण नहीं कर पा रहे हैं ग्राम प्रधान बेहतर व्यवस्थाएं बनाने में फेल नजर आ रहे हैं हराचारा कागजों में मिलना भले ही दर्शाया जा रहा हो लेकिन गोवंशों को हरी पत्ती के 10 फीसदी गौ आश्रय स्थलों में ही दर्शन हो रहे होंगे जबकि शासन द्वारा जो बजट दिया जा रहा है उसमें हरा चारा चोकर खली की व्यवस्थाएं निहित की गई है फिर भी गौ आश्रय स्थल अब व्यवस्थाओं के शिकार होकर बेजुबानों पर भारी पड़ते नजर आ रहे हैं। विकासखंड कुठौद की ग्राम पंचायत ईंटों की अव्यवस्थाओं को लेकर प्राथमिकता के साथ समाचार प्रकाशित किया था लेकिन समाचार पर किसी ने भी गौर तलब नहीं किया जिसके परिणाम स्वरुप ही तड़प तड़प कर एक साथ पांच गौवंश की मौत हो गई और उन्हें खुले में निर्दयता पूर्वक डाल दिया गया जब वह मामला सोशल मीडिया की सुर्खियां बना तो अधिकारी बंगले झांकने लगे हालांकि समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया गया और गौ वंशजों को दफन कर दिया गया था। अगले दिन अधिकारियों ने सघन भ्रमण किया तथा प्रथम दृष्टि या दोषी पाए जाने पर ग्राम पंचायत सचिव को नोटिस देकर उनसे स्पष्टीकरण मांगा है। अभी समाचार होगी गोवंश को सुख सुविधा प्रदान करने के लिए प्रत्येक गांव वंश पर ₹50 की धनराशि प्रतिदिन के हिसाब से दी जा रही है जिससे भरण पोषण करना अब किसी भी प्रकार से असंभव नहीं है। जिम्मेदारों के नकरापन के चलते अभी भी गौ आश्रय स्थलों में वह सब इंतजाम देखने को नहीं मिल रहे हैं जो होने चाहिए। अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण भी को वंशजों पर खड़े नहीं उतर पा रहे हैं कारण निरीक्षक के समय जी सर इसके बाद नोर का काम चल रहा है यदि मनरेगा योजना की बात की जाए तो यही जिम्मेदार इतनी उतावली रहते हैं जैसे इन्हें कुबेर का खजाना मिलने वाला हो गाय को हिंदू समाज में पूजनीय एवं बंदिनी माना जाता है जन्म से लेकर मृत्यु तक उसका महत्व बताया गया है परंतु गांव का भगवान माने जाने वाले प्रधान उनके प्रति लापरवाह बने हुए हैं ।स्थानीय अधिकारियों द्वारा किए जाने वाले निरीक्षण भी उनकी मनोदशा तथा दैनिकदशा में सुधार हेतु कारगर नहीं हो रहे हैं। सोमवार को सायंकाल मीडिया द्वारा कई अस्थाई गौशालाओं की पड़ताल की गई जिसमें जमींनी हकीकत कुछ और कागजी हकीकत कुछ और देखने को मिली बीते सप्ताह गौशालाओं की दिन हैं दशा को लेकर कई खबरें प्रकाशित की थी जिसको लेकर अधिकारियों के दौर भी शुरू हुए तथा कुछ हद तक सुविधा अनुकूल भी देखने को मिली तो कहीं-कहीं अभी भी वही स्थिति बनी हुई है जो पूर्व में थी ठंड से बचाव के लिए अलाव अभी तक हर जगह नहीं जल रहे हैं ना ही छोटे-छोटे भवन साजों को अलग रखने की प्रक्रिया आरंभ हो सकती है आसमान से रात के दूसरे पर बर्फ सी पड़ती है जिससे गोवंश ठिठुर कर अपनी साथ भारी रात काटने को विवश देखे जा रहे हैं इनकी दीन दशा पर तरस आता है परंतु जिम्मेदार हैं कि कोई डेट चित्र के द्वारा काम ही नहीं करना चाहते समाचार पत्रों की सुर्खियां बनी 28 तारीख से गौशाला में समस्याओं का अंबार विभिन्न अंचलों से खबरों का प्रकाशन जारी है जिस पर खंड विकास अधिकारी तथा पशु चिकित्सा अधिकारियों द्वारा सघन निरीक्षण का काम शुरू कर दिया गया है। विकास सरकारी कुटुंब सर्वेश कुमार रवि ने वार्ता करते हुए बताया कि मेरे द्वारा प्रतिदिन 4 से 6 गोशाला स्थलों का निरीक्षण किया जाता है तथा मैं स्वयं अलाव की व्यवस्था जब तक नहीं हो जाती है मौके पर रहता हूं फिर भी सफलता सामने आ रही है इसको लेकर अब जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला भी शुरू कर दिया गया है गोशाला स्थलों में किसी भी प्रकार की हीला हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आज 28 तारीख गौशालाओं की पड़ताल में ग्राम पंचायत सलाहुआ जागीर की गौशाला का हाल देखा गया यहां पर पाया गया की गौशाला में कार्य चल रहा था ठंड से बचाव के लिए तिरपाल की व्यवस्था पूर्ण थी लेकिन अलाव और प्रकाश व्यवस्था के नाम पर यहां पर कुछ भी देखने को नहीं मिला जिससे प्रतीत होता है कि गौशालाओं की जिम्मेदारी को संभालने वाले लोग अभी भी शासन प्रशासन के खौफ से वेखौफ बने हुए हैं। यहां आपको बताते चलें कि अस्थाई गौशाला में चारों तरफ से लगाई गई तार फेंसिंग भी कई जगह से टूटी हुई थी !जिससे गोवंश रात में बाहर निकल जाते हैं पर बड़ी मुश्किल से उन्हें काबू करके वापस अस्थाई गोआश्रम स्थल पर लाया जाता है।केयर टेकर द्वारा बताया गया कि भूख सारा गांव से कट के आता है किसी नियमित खिलाया जाता है इस बात की पुष्टि वहां पर खड़े लोगों द्वारा भी की गई! जिसका धीरे-धीरे अच्छा असर पड़ता भी दिखाई देने लगा है।