भागवत भगवान भक्तों पर कृपा करने के लिए लेते है अवतार- बद्री प्रपन्नाचार्य

– श्रीमद्भागवत कथा का छठवां दिन
चित्रकूट: ग्राम पंचायत ऐंचवारा में प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष सुनील शुक्ला के आवास में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथावाचक बद्री प्रपन्नाचार्य महाराज ने तुलसी विवाह एवं रुक्मणी विवाह का मामिर्क प्रसंग सुनाकर भक्तों को सराबोर कर दिया कथा श्रोता रुक्मणी विवाह की आकषर्क झांकी देख बेहद प्रफुल्लित नजर आए।
कहा कि ईश्वर सवर् व्यापक है। भागवत भगवान दुष्टों का संहार करने, गौ व ब्राह्मणों की रक्षा करने के साथ ही मूल रूप से अपने भक्तों पर कृपा करने के लिए अवतार लेते हैं। कहा कि ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए न तो हवन की जरूरत है और न ही पाठ की है। केवल ईश्वर से निश्चल प्रेम की जरूरत है। जिसने भी सब कुछ त्यागकर ईश्वर से प्रेम किया है, उसको नारायण की कृपा प्राप्त हुई है। माता कौशिल्या, माता यशोदा सहित अन्य कई उदाहरण है। जिसने भी निष्छल प्यार किया, उस पर ईश्वर ने कृपा की है। हकीकत तो यही है कि भगवान न तो कहीं आते हैं और न कहीं जाते है। वह सवर्त्र व्याप्त है, बस वह दिखाई नहीं देते। दिखाई भी देते हैं, तो उन्हीं को जो भगवान से निष्छल प्रेम करते है। बस उनको प्यार से पुकारने की जरूरत है। ईश्वर प्रेम के भूखे हैं, उनको न तो मेवा की जरूरत है और न मिष्ठान की है। रुक्मणी विवाह में रोशनी और खुशी ने रुक्मणी और श्रीकृष्ण की भूमिका निभाई। यजमान त्रियुगी देवी, सुनील शुक्ला और उनकी धमर्पत्नी आरती ने भगवान का पूजन किया। इसके बाद सभी श्रोताओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान बुआराम शुक्ल, गोविंद शुक्ला, सीताराम शुक्ल, हरिशंकर द्विवेदी, श्रीनिवास शुक्ला, सुनील तिवारी, बब्बू त्रिपाठी, गोविंद तिवारी, प्रकाश आदि मौजूद रहे।