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माता-पिता की सेवा करने वाले हो जाते हैं संसार रूपी सागर से पार- मुरलीधर

माता-पिता की सेवा करने वाले हो जाते हैं संसार रूपी सागर से पार- मुरलीधर

रामायण मेला परिसर में चल रही श्रीराम कथा का चैथा दिन

चित्रकूट ब्यूरो: चैत्र मास के अवसर पर सीतापुर स्थित रामायण मेला परिसर में चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के चैथे दिन शुक्रवार को कथावाचक संत मुरलीधर महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास महाराज द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में वणिर्त भगवान राम के वन गमन के प्रसंग, निषादराज प्रसंग व केवट प्रसंग का बड़ा ही मामिर्क वणर्न किया।
कथा के दौरान भगवान राम के वन गमन के आदेश की मामिर्क चैपाइयां सुनकर श्रोताओं की आंखों में आंसू आ गए। प्रसंग के माध्यम से कथावाचक मुरलीधर महाराज ने बताया कि वतर्मान में जिसके माता-पिता इस दुनिया में जीवित है, वह सबसे भाग्यशाली इंसान है। जो माता-पिता की सेवा करता है, वह इस संसार रूपी सागर से पार उतर जाता है तथा जो उनकी आत्मा को दुखाता है, वह इस संसार रूपी सागर में डूब जाता है। उन्होंने कहा कि रामायण में दासी मंथरा के भड़काने से महारानी कैकेई ने राजा दशरथ से भगवान राम के वन गमन का आदेश दिलवा दिया, जिसका अनुपालन करने के लिए भगवान राम अयोध्या से सशरीर वन को चले गए, लेकिन अयोध्या के लोगों के हृदय में भगवान राम हमेशा विराजित रहे तथा वह लोग भगवान श्रीराम की प्रतीक्षा में संन्यासियों सा जीवन व्यतीत करने लगे।
इस मौके पर भागवताचायर् सिद्धाथर् पयासी, चंद्रकला रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन, विष्णु गोयल, डॉ. चंदा शमार् सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
इसी प्रकार नगर के बसस्टैंड स्थित केशरवानी धमर्शाला में श्रीकृष्ण कथा के दूसरे दिन कथा वाचाक वृंदावन निवासी संजय कृष्णा ठाकुर ने ज्ञान और वैराग्य पर विचार रखे। इस मौके पर रामलखन, रोहित, गोपाल, दीनबंधु, रामदास, राम सवारी, केशन, राकेश केशरवानी, अतुल, संजय व दीपक आदि मौजूद रहे।

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