लॉकडाउन के शुरुआती दो हफ्तों में रेलवे कर्मियों ने हेल्‍पलाइन(138 और 139),सोशल मीडिया तथा ईमेल पर 2,05,000 से ज्‍यादा प्रश्‍नों के उत्‍तर दिए

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उनमें से 1,85,000 से अधिक का उत्‍तर सीधे टेलीफोन पर संवाद के जरिए दिया गया रेलवे हेल्‍पलाइन139, 138,सोशल मीडिया और ईमेल पर 24×7वास्‍तविक समय पर उत्‍तर दिए गए राष्‍ट्रीय रेल मदद हेल्‍पलाइन 139 की सेवाएं जारी हैं,जबकि जियो-फ़ेंसड डिस्ट्रीब्यूटेड हेल्पलाइन 138स्थानीय मुद्दों का समाधान स्थानीय भाषा में कर जनता तक पहुंच बनाती है, जो इसे सही मायनों में प्रभावी बनाता है

भारतीय रेलवे ने रेल यात्रियों, अन्य नागरिकों की सहायता करने और माल परिचालनों संबंधी मुद्दों को सुलझाने में मदद करने के लिएलॉकडाउन की घोषणा के बाद हेल्पलाइन सुविधाओं में वृद्धि की है। कुछ दिन पहले, इसकी शुरुआत के बाद सेयहसुविधा प्रबंधन की दृष्टि से इस हद तक सफल रही है कि रेलवे कर्मियों ने लॉकडाउन के पहले दो हफ्तों में निर्दिष्ट कम्‍युनिकेशनप्लेटफार्म्स पर 2,05,000 से अधिक प्रश्नों का जवाब दिया है, उनमें से 90% (1,85,000 से अधिक) का उत्‍तर फोन पर सीधे बातचीत के माध्यम से दिया गया।

रेलवे कंट्रोल ऑफिस चार कम्‍युनिकेशन और फीडबैक प्लेटफार्म्स – हेल्पलाइन-139, 138, सोशल मीडिया (एस्प ट्विटर) और ईमेल ([email protected]) की 24×7 निगरानी कर रहा है। ऐसा लॉकडाउन के दौरान रेलवे प्रशासन और आम जनता के बीच सूचना और सुझावों के निर्बाध प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए किया जा रहा है।

हेल्पलाइन का परिचालन निदेशक स्तर के अधिकारियों द्वारा चौबीसों घंटे किया जा रहा है। ये अधिकारी सोशल मीडिया और ईमेल के माध्‍यम से प्राप्त नागरिकों के फी‍डबैक और सुझावों पर नजर रखते हैंऔर यह सुनिश्चित करते हैं कि लॉकडाउन की अवधि के दौरान रेलवे ग्राहकों (विशेषकर माल परिवहन) के समक्ष आने वाली किसी भी तरह की कठिनाई को दूर करने के लिए उचित कार्रवाई की जाए। इस टीम के एक भाग के रूप में एडीआरएम के स्तर के फील्ड अधिकारी अपने डिविजनल स्तर पर निगरानी करते हैं।

लॉकडाउन के शुरुआती दो हफ्तों में रेलमदद हेल्पलाइन 139 ने आईवीआरएस सुविधा के माध्‍यम से उत्‍तर देने के अ‍लावासीधे संवाद के आधार पर 1,40,000 से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए। जहांएक ओर ज्यादातर प्रश्‍न ट्रेन सेवाओं के शुरू होने और रिफंड नियमों को ढीला किए जानेसे संबंधित रहे(जो जनता से मिली प्रतिक्रिया के आधार पर किया गया है),वहीं दूसरी ओरसोशल मीडिया इस कठिन घड़ी में रेलवे की ओर से किए जा रहे  प्रयासों की सराहना से भरा पड़ा है। रेलवे के जिन प्रयासों की सराहना की जा रही है, उनमें आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई करने वाली मालवाहक गाड़ियों का परिचालन, वैगनों के देर से छूटने के लिए जुर्माने से माफी, कोचों को अस्पताल के वार्डों में परिवर्तित करना, भोजन के पैकेटों का वितरण, कोविड -19 से लड़ने के लिए आवश्यक पीपीई, सैनिटाइज़र और अन्य उपकरण तैयार करना आदि शामिल हैं।

हेल्पलाइन 138 पर प्राप्त कॉल जियो-फ़ेंसड हैं, यानी फोन कॉल करने वाले व्‍यक्ति के स्‍थान के अनुसार, उसकी कॉल निकटतम रेलवे डिविज़नल कंट्रोल ऑफ़िस (जहां स्थानीय भाषा सेबखूबी वाकिफ और स्थानीय मुद्दों से परिचित रेलवे कर्मियों द्वारा चौबीसों घंटे निगरानी की जाती है) में जाती है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि कॉल करने वालों को उसी भाषा में जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त हो, जिसे बोलने में वे सहज हों। यह नई विशेषता भाषा संबंधी बाधा को मिटा देती हैतथाडिवीजन के पास उपयुक्‍त जानकारी उपलब्ध होते हीरेलवे ग्राहकों और अन्य लोगों तक तेजी से सूचनाओं को पहुंचाती है।

यहां यह कहना भीउपयुक्‍त होगा कि भारतीय रेलवे ने यात्रियों तथा सभी वाणिज्यिक ग्राहकों के हितों का ध्यान रखनेऔर राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला को हर समय सुचारु रखना सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किए हैं ।

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