विवेकानंद की जयंती के अवसर पर ‘‘युवा उत्सव’’

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प्रयागराज, १२ जनवरी,
उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, प्रयागराज, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की अनूठी पहल पर केन्द्र के प्रेक्षागृह में १२ जनवरी, २०२१ को युग पुरूष स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर युवा उत्सव का आयोजन किया गया। इस आयोजन के मुख्य अतिथि युवा संत, योग गुरू स्वामी आनंद गिरी जी महाराज रहे।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि, इलाहाबाद विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग के डॉ० चितरंजन सिंह व डॉ० सुजीत सिंह व केन्द्र निदेशक इन्द्रजीत ग्रोवर ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया, केन्द्र निदेशक द्वारा आमंत्रित मुख्य अतिथि व गणमान्य का शब्द सुमनों से स्वागत किया गया।

केन्द्र की ओर से निदेशक महोदय द्वारा योग गुरू को अंग वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंटकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर योग गुरू स्वामी आनंद गिरी द्वारा स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तृत चर्चा करते हुए उनके जीवन से जुड़ी कई घटनाओं विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया, जिसके अन्तर्गत अमेरिका स्थित शिकागों में १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर सनातन धर्म के प्रतिनिधित्व का वृतान्त हो या नारी सम्मान की बात हो।

विश्व के कई भाषाओं के मूर्धन्य विद्वानों से वेद-वेदान्त व सनातन धर्म पर चर्चा में भी स्वामी जी अतुलनीय थे, संस्कृति और फारसी ऐसी भाषाओं पर उनकी अद्वितीय पकड़ थी। योग गुरू के व्याख्यान से प्रेक्षागृह में उपस्थित जनमानस को ज्ञान बोध के साथ ज्ञानार्जन का भी अवसर प्राप्त हुआ। प्रयागराज की युवा लोकगीत गायिका करिश्मा गुप्ता द्वारा माँ भगवती गंगा की आराधना में भजन ‘‘तरल तरंगिनि अविरल गंगे, मोक्षदायनी पावन गंगे’’ की प्रस्तुति की गयी, कार्यक्रम की अगली कड़ी में सांई आर्ट ग्रुप द्वारा गंगा आरती की प्रस्तुति की गई। इसके पश्चात डॉ० चितरंजन सिंह द्वारा युग पुरूष स्वामी विवेकानंद के जीवन पर आधारित व्याख्यान के अन्तर्गत उनके विचारों पर प्रकाश डाला गया वहीं डॉ० सुजीत सिंह द्वारा अपने वक्तव्यों में स्वामी जी के जीवन व उनके आदर्शों पर व्याख्यान प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अगले पायदान में काव्यपाठ की प्रस्तुति के अन्तर्गत उत्कर्ष सिंह की कविता ‘‘रगो में दौड़ते फिरने के हम नहीं कायल, जो आँख ही से न टपका तो फिर लहू क्या है’’, वहीं रीतिका पाण्डेय की रचना ‘‘हे युवा वायु के पुत्र हो तुम’’, देवव्रत अवधवासी की रचना ‘‘जिसको जिस अभाव ने मारा, उसने वैसी कविता चुन ली’’, देवेश पाण्डेय तथा प्रत्युश रौनक द्वारा भी अपनी रचनाओं से दर्शकों में एक अलग शमा बाधी।

कार्यक्रम को गति देते हुए वाराणसी की युवा कथक नृत्यांगता रिचा पाण्डेय द्वारा कथक के कई पहलुओं को बड़ी ही बखूबी से प्रस्तुत किया गया, जिसके अन्तर्गत थाट, आमद, परन, टुकड़ा के साथ ठुमरी ‘‘मग रोको नारे सांवरिया’’ की प्रस्तुति ने दर्शकों मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं प्रयागराज के सुदूर ग्रामीण अंचल से पधारी कोल समाज की युवा बालिकाओं द्वारा पारम्परिक सोहर और सोलह संस्कारों से जुड़े कोल जनजाति के गीतों की प्रस्तुति दी।

दक्षिण भारतीय शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम की खूबसूरत प्रस्तुति से प्रयागराज की प्रज्ञा रावल ने कार्यक्रम में एक अलग अलख जगाया, वहीं ग्रामीण अंचल के रामसुचित एवं त्रेतिमा कुमारी ने बिरहा गायन के अन्तर्गत ‘‘देश के धरतिया के बा हिन्द, इज्जतिया बतावै लोगवा’’ को दर्शकों की सरहाना मिली। कार्यक्रम के अन्त में युवा कलाकारों को केन्द्र निदेशक महोदय ने स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया।

मधुकांक मिश्रा ने धन्यवाद ज्ञापित कर दर्शको का आभार व्यक्त किया, कार्यक्रम में मंच संचालन इलाहाबाद विश्वविद्यालय से आये युवा छात्र-छात्रा विप्लव कुमार यादव व शांता सिंह द्वारा किया गया।