वतर्मान समय में हैं भरत चरित्र को अपनाने की आवश्यकता- मुरलीधर

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वतर्मान समय में हैं भरत चरित्र को अपनाने की आवश्यकता- मुरलीधर

– नौ दिवसीय श्रीराम कथा का आठवां दिन

चित्रकूट ब्यूरो: सीतापुर स्थित रामायण मेला परिसर में चैत्र मास के अवसर पर चल रही नौ दिवसीय श्रीराम कथा के आठवें दिन मंगलवार को कथावाचक संत मुरलीधर महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास महाराज द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस के अयोध्या काण्ड में वणिर्त भगवान श्रीराम के वन गमन के प्रसंग के तहत भरत चरित्र का वणर्न किया। इस दौरान रामायण की चैपाइयां सुनकर सभी श्रोता भाव-विभोर नजर आए।
कथा के दौरान प्रसंग के माध्यम से कथावाचक मुरलीधर महाराज ने बताया कि भ्रातृत्व प्रेम किसी का है तो वह भरत का। वतर्मान समय में भरत चरित्र की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। स्वाथर् के कारण आज भाई-भाई जहां दुश्मन जैसा व्यवहार करते हैं, वहीं भरत चरित्र त्याग, संयम, धैयर् और ईश्वर प्रेम का दूसरा उदाहरण है। भरत का विग्रह श्रीराम की प्रेम मूतिर् के समान है। जिससे भाई के प्रति प्रेम की शिक्षा मिलती है। इस मनुष्य जीवन में भाई व ईश्वर के प्रति प्रेम नहीं है, तो वह जीवन पशु के समान है। कहा कि सभी को भरत और श्रीराम से भाई व ईश्वर प्रेम की सीख लेनी चाहिए। रामायण में भरत ही एक ऐसा पात्र है, जिसमें स्वाथर् व परमाथर् दोनों को समान दजार् दिया गया। इसलिए भरत का चरित्र अनुकरणीय है। भरत चरित्र का प्रत्येक प्रसंग धमर् सार है क्योंकि भरत का सिद्धांत लक्ष्य की प्राप्ति व राम के प्रेम को दशार्ता है।
इस अवसर पर यज्ञवेदी मंहत सत्यदास महाराज, पूवर् सांसद भैरोप्रसाद मिश्रा, राजेश कुमार करवरिया, भागवताचायर् सिद्धाथर् पयासी, चंद्रकला रमेश चंद्र मनिहार, विजय महाजन, नीलम महाजन, अशोक ढींगरा सहित अनेक संत वृंद व श्रद्धालु मौजूद रहे।

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