गौवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित किये गये निराश्रित/बेसहारा गौवंश

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गौवंश आश्रय स्थलों में संरक्षित किये गये निराश्रित/बेसहारा गौवंश

उरई (जालौन) वर्ष 2018-19 से विकास खण्ड स्तर पर मा0 मुख्यमंत्री जी के दिशा निर्देशन में गौआश्रय स्थलों का निर्माण कराकर गौशालाओं में निराश्रित/बेसहारा गौवंशों को संरक्षित करने का कार्य किया जा रहा हैं। वर्तमान में विकास खण्ड माधौगढ़ के अन्तर्गत 21 गौआश्रय स्थल संचालित किये जा रहे है, जिसमें 1847 निराश्रित गौवंश रखे जा रहे है, उनके भरण-पोषण की धनराशि गौवंशों की संख्या के आधार पर ग्राम पंचायतांे के खातों में हस्तान्तरित की जाती है, जिससे उन्हें भूसा-दाना, चोकर आदि क्रय कर गौवंशों को खिलाया जाता हैं। धूप व सर्दी से बचाव के लिये शेड के चारो तरफ तिरपाल आदि लगाकर बचाव भी किया जाता है। गौआश्रय स्थलों पर संरक्षित किये जा रहे बेसहारा गौवंशों के लिये हरा चारा व पानी, छाया की व्यवस्था की गयी हैं। गौआश्रय स्थलों के संचालन से निराश्रित गौवंशों को भरण पोषण स्वच्छ पेयजल छाया आदि सुविधायें उपलब्ध हो रही है जिससे गौवंश स्वस्थ्य वातावरण में रह रहे है, वही दूसरी तरफ कृषकों की फसल भी सुरक्षित हो रही है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है। समय-समय पर अधोहस्ताक्षरी विकास खण्ड स्तरीय अधिकारियों एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा गौवंश स्थलों का निरीक्षण कर गौवंश आश्रय स्थलों की व्यवस्थायें भी देखी जाती हैं।

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