आगनवाङी केंद्र पर स्वावलंबन कैम्प का आयोजन महिला कल्याण अधिकारी अल्कमा अख्तर द्वारा  किया गया।

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आगनवाङी केंद्र पर स्वावलंबन कैम्प का आयोजन महिला कल्याण अधिकारी अल्कमा अख्तर द्वारा  किया गया।

उरई (जालौन)महिला कल्याण विभाग के तत्वाधान में मिशन शक्ति अभियान “4.0“ के अंतर्गत जनपद जालौन के उरई शहर में  दिनांक 27-06-2022 को वार्ड नम्बर27 में आगनवाङी केंद्र पर स्वावलंबन कैम्प का आयोजन महिला कल्याण अधिकारी अल्कमा अख्तर द्वारा  किया गया। महिला कल्याण अधिकारी ने बताया कि स्वावलंबन कैम्प के माध्यम से उ0प्र0 सरकार द्वारा संचालित योजनाओं यथा-मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना, उ0प्र0 मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना, पति के मृत्युपरान्त निराश्रित महिला पेंशन, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ आदि योजनाओं को इनवन विण्डो कैम्प के तहत महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होने बताया कि कि हर महिला को अपनी सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जिम्मेदार होते हुए कुछ चीजों की जानकारी जरूर होनी चाहिए, सरकार व गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा महिलाओं के हित के लिए कई हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं, इन नंबरों को अपने फोन में सुरक्षित कर खुद को सुरक्षित रखने का तोहफा दें। उन्होंने बताया कि 1090 वूमेन पावर लाइन, 181 महिला हेल्पलाइन, 1076 मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, 112 पुलिस आपातकालीन सेवा, 1098 चाइल्ड लाइन, 102 एम्बूलेंस सेवाएं एवं 108 एंबुलेंस सेवाएं महिलाओं की सुरक्षा के लिए जारी किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मिशन शक्ति अभियान “4.0“ के अंतर्गत महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और पहले से अब महिलाओं में काफी बदलाव आ रहा है। महिला कल्याण अधिकारी ने बताया कि दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, महिलाओं का कार्य स्थल पर लैंगिक उत्पीड़न, कन्या भ्रूण हत्या के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बताया कि दहेज निषेध अधिनियम 1961 के अनुसार दहेज लेन-देन या इसके लेनदेन में सहयोग करने पर 5 वर्ष की कैद और 15000 रुपए जुर्माना का प्रावधान है। दहेज एक सामाजिक समस्या है, जिसका उन्मूलन तभी हो सकता है, जब हम संकल्प पूर्वक इसके विरुद्ध कदम उठाएं। दहेज लेना वह देना अपराध की श्रेणी में है। उन्होंने बताया कि पूर्व गर्भाधान और प्रसव पूर्व निदान तकनीक पीसीपीएनडीटी अधिनियम 1994 भारत में कन्या भ्रूण हत्या और गिरते लिंगानुपात को रोकने के लिए कानून है। इसके तहत जन्म से पूर्व शिशु के लिंग की जांच पर पाबंदी है और घरेलू हिंसा के बारे में विस्तार से बताया।इसी के साथ ही उन्होने बताया कि कन्या सुमंगला योजना प्रदेश सरकार द्वारा संचालित की जा रही है, इसका उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या को समाप्त करना, समान लैंगिक अनुपात स्थापित करना, बाल विवाह की कू-प्रथा को रोकना, बालिका के स्वास्थ्य व शिक्षा को प्रोत्साहन देना और उन्हें स्वावलम्बी बनाना है। इस योजनान्तर्गत 06 श्रेणियों में लाभार्थियों को लाभ दिया जाता है, जिसमें प्रथम श्रेणी के अन्तर्गत बालिका के जन्म होने पर 2000 रू0, द्वितीय श्रेणी में बालिका के एक वर्ष तक के पूर्ण टीकाकरण के उपरान्त 1000 रू0, तृतीय श्रेणी में कक्षा 1 में बालिका के प्रवेश करने पर 2000 रू0, चतुर्थ श्रेणी में कक्षा 6 में बालिका के प्रवेश करने पर 2000 रू0, पंचम श्रेणी में कक्षा 9 में बालिका के प्रवेश करने पर 3000 रू0 एवं 6वीं श्रेणी में ऐसी बालिकाएं जिन्होने कक्षा 12वीं उत्तीर्ण करके स्नातक-डिग्री या कम से कम दो वर्षीय डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश लिया हो 5000 रु0 दिया जाता है। योजना का लाभ लेने के लिए लाभार्थी उ0प्र0 का निवासी हो, स्थायी निवास प्रमाण पत्र उसके पास हो, लाभार्थी के परिवारिक वार्षिक आय अधिकतम 3 लाख रू0 हो, किसी परिवार की अधिकतम दो ही बच्चियों को इस योजना का लाभ मिलेगा।
इस अवसर पर आगनवाङी कार्यकत्री रजनी देवी,रेशमा,रानी देवी व सहायिका एवं महिलायें,बालिकाएं  उपस्थित  रही।

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