3 वर्ष से लगातार बाढ़ की मार झेल रहे किसानों को फसलें डूबने का मुआवजा दिलाए जाने की मांग

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रामपुरा कुठौंद जालौन:- जनपद जालौन के तहसील जालौन व विकासखंड कुठौंद के अंतर्गत यमुना नदी की विभीषिका बाढ़ को लगातार सन् 2019 तथा सन् 2021 व सन् 2022 बाढ़ के कारण किसानों को बहुत ही संकट का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि लगातार तीन वर्षों से फसलें नष्ट हो जाने से किसानों के परिवार को बहुत ही पिछड़ापन महसूस हो रहा है क्योंकि किसानों के पास कृषि के अलावा और कोई भी जीवन यापन करने की व्यवस्था नहीं होती है। इधर सन 2020 में कोरोना महामारी जैसी बीमारी का पूरे वर्ष तांडव रहा इस महामारी का संकट जैसे कि पत्थर को तोड़ने के बराबर सामना करना पड़ा। इसके बाद सन् 2021में यमुना नदी का जल स्तर बढ़ने के कारण फसलें जल समाधि हो गई। और वर्तमान साल सन् 2022 में पूर्व वर्ष की भांति बाढ़ का संकट झेलना पड़ा। इसके पहले बारिश ना होने के कारण खेतों की बुवाई ना हो सकी जब वर्षा हुई तब जाकर के किसानों ने अपने खेतों में फसल बोई लेकिन कुदरत की मार को झेल रहे किसानों को बहुत ही चिंता व्याप्त हो रही है। क्योंकि फसलों के द्वारा मानव का जीवन यापन होता है और साथ साथ में पशुओं का भी चारा आदि से जीवन यापन होता है। अब इन दोनों चीजों से वंचित होने के कारण यमुना नदी की बाढ़ से प्रभावित किसानों की शासन व प्रशासन से मांग है कि कुछ सहायता प्रदान कराई जाने की रखी जाए। विकासखंड कुठौंद के अंतर्गत बाढ़ से प्रभावित गांव भदेख दिवारा, टिकरी मुस्तकिल, करमुखा, लोहई दिवारा, नैना पुर चौथ, सीपुरा, बघावली, खेड़ा मुस्तकिल, ऊमरी, शंकरपुर, मसगांव सहित कई गांव बाढ़ की चपेट में आए हुए हैं और इनकी फसलें तथा सैकड़ों की संख्या में मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। ग्राम बिजुआ पुर जो यह गांव माधवगढ़ तहसील के अंतर्गत आता है इसमें भी काफी बाढ़ के कारण क्षति पहुंची है। इसलिए शासन व प्रशासन से ग्रामीणों की मांग है की दैवी आपदा कोष से किसानों को अनुदान के रूप में मानक के अनुसार जीवन यापन हेतु राहत धनराशि उपलब्ध कराई जाए। ताकि किसानों का हृदय धैर्य धारण करने के लिए अपना मनोबल बढ़ा सकें। सन् 2021में लेखपालों द्वारा की गई लापरवाही के कारण कई गांव के किसान दैवी आपदा कोष की धनराशि मिलने से वंचित रहे। इस बर्ष बाढ़ के प्रकोप की मार को बर्दाश्त करने वाले किसानों के लिए शासन व प्रशासन द्वारा कड़े निर्देशों के आधार पर राजस्व विभाग द्वारा टीम गठित कर बाढ़ प्रभावित ग्रामों की मौके पर जांच करने के बाद पीड़ित किसानों को शासन द्वारा मदद दी जानी चाहिए। ताकि पीड़ित ग्रामीण अपना भरण पोषण तथा पशुओं का भरण पोषण कर सके। और जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं उन्हें बाढ़ ग्रस्त देवी आपदा से आवास दिए जाएं ताकि यह लोग अपने परिवार का उस आवास में रहकर जीवन यापन कर सकें। बाढ़ से प्रभावित गांव की ग्रामीणों की शासन व प्रशासन से करुणामई पुरजोर अपील है की हम पीड़ित किसानों को शासन व प्रशासन द्वारा सहायता प्रदान की जाए।