छत्तीसगढ़ राज्य ” बागेश्वर धाम ” श्री हनुमान जी की कृपा से हो रहे हैं सभी काम ।

छत्तीसगढ़ राज्य ” बागेश्वर धाम ” श्री हनुमान जी की कृपा से हो रहे हैं सभी काम ।

एक बड़े इंटरव्यू में पूछे जाने पर आचार्य पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी ने स्पष्ट कहा है ,कि वह कोई संत महात्मा या तपस्वी नहीं है वह सिर्फ हनुमानजी के भक्त हैं और गद्दी पर बैठने के बाद उनको जो भी अनुभूति होती हैं, वही वह सबके प्रत्यक्ष अपने पर्चे पर लिख कर देते है और वही सब बाते सच निकलती हैं । यह कोई चमत्कार नहीं है यह दिव्य दरबार की शक्ति है जो कि भक्तों को परेशानियों से मुक्ति दिलाती है उन्हें मार्गदर्शन देती है जीवन के लिए।

उन्होंने बताया कि वे दरबार का श्रद्धा पूर्वक नियम से पालन कर रहे हैं वह उनकी कई पीढ़ियों से लगाया जा रहा है। वे अपने दरबार एवम् अपने इष्ट हनुमान जी ” बागेश्वर धाम ” ईश्वर पर सच्ची श्रद्धा रखते हैं। वाल्यबस्था से ही अपने गुरु के निर्देशानुसार श्री बालाजी महाराज की सेवा कर रहे हैं। उनका स्पष्ट कहना है कि जो भी हैं सब बालाजी की कृपा ही हैं। गद्दी पर बैठने के बाद वे बालाजी की कृपा से ही सब कुछ बताते हैं।बाकी समय में वे एक आम व्यक्ति की तरह ही बह भी सामान्य ही हैं।

वे अपने दरबार में बुलाने के लिए किसी को भी इनविटेशन नहीं देते उनके दरबार की महिमा देखकर सच्चे भक्त स्वयं अपने परेशानियों का निराकरण करने और ईश्वर के दर्शन करने के लिए स्वयं ही आते हैं। वे सच्चे साधक है जो कि हनुमान जी की सेवा बाल्य अवस्था से ही कर रहे हैं। ईश्वर की निरंतर जाप और भक्ति से ही उनमें उनके ऊपर बागेश्वर धाम की यह कृपा हुई है उनका यही कहना था कि हनुमानजी ने उन्हें स्वयं सेवा के लिए उनको चुना है और वे उनकी सेवा में लगे हुए हैं।
यदि दरबार से किसी का कोई काम बनता है तो लोग उसको चमत्कार कहते हैं और बागेश्वर धाम महाराज जी की सेवा में लगे पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी इसको ईश्वर की कृपा ही कहते हैं। बागेश्वर धाम महाराज जी किसी भी प्रकार की कोई चमत्कार करने का कोई दावा नहीं करते उनका स्पष्ट कहना है कि वह सेवा करते हैं और उन्हें उनकी भक्ति से जो उनपर कृपा प्राप्त हुई है बालाजी की उन्हें उसकी जो अनुभूति होती है उसी से वे जग कल्याण में लगे हुए हैं।
सनातनी होने के नाते उन्होंने अपने धर्म की ही बात की है, वे बस धर्म की एकजुटता की बात करने के लिए ही तत्पर हैं वह किसी और को किसी और का धर्म अपनाने को बाध्य नहीं करते। जो लोग सच्चे मन से आकर अर्जी लगाते हैं दरबार में उन सभी के काम बनते हैं। दरबार में बैठकर भी वे सिर्फ और सिर्फ बालाजी महाराज का ” स्मरण ” व नाम जपने के लिए ही सबको कहते हैं अन्य कोई कर्म करने के लिए कभी किसी से कोई दान दक्षिणा नहीं लेते। वे सिर्फ अपने धर्म का प्रचार प्रसार कर रहे हैं हनुमान जी की भक्ति करना यदि कोई अपराध है तो वह यह स्वीकार करते हैं धीरेंद्र शास्त्री जी का कहना था कि यदि इतने वर्षों से किया जाने वाला हनुमान चालीसा गलत है तो वह भी गलत है यदि हनुमान चालीसा में यह कहा गया है भूत पिशाच निकट नहीं आवे यदि यह सत्य नहीं है, तो वह भी सत्य नहीं है । परंतु सत्य तो यही है कि हनुमान जी पर सभी की आस्था है और सभी दिव्य ( पारलौकिक ) शक्तियों पर विश्वास करते हैं। वे संत या साधु नहीं है ,वे सिर्फ परमात्मा के आगे सब की अर्जी के लिए निवेदन करते हैं और लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
सामान्य रूप से उनका दरबार कई सालों से लग रहा है वह मीडिया में भी इतने प्रचलित स्वयं नहीं हुए हैं सर्वप्रथम उनका संस्कार टीवी चैनल वालों ने सनातन होने के नाते ही प्रसारित किया था । उनके द्वारा होने वाली कथा के प्रोग्राम को जैसे-जैसे प्रसिद्धि मिलती गई लोग उनसे स्वयं जुड़ते गए। उन्होंने कभी किसी को बाध्य नहीं किया अपना चैनल या अपनी कथा का लाइव करने के लिए। वे सभी से यही कहना चाहते हैं की सभी को अपने धर्म का सम्मान करना चाहिए। अपने धर्म की एकजुटता के लिए वे सदैव समर्पित हैं और जो भी भविष्य में बाधा आएगी उसका भी डटकर सामना करेंगे। सत्य को कभी भी किसी के प्रत्यक्ष प्रमाण की जरूरत नहीं पड़ती। सत्य सत्य ही होता है यदि नकारात्मक शक्तियां हैं तो सकारात्मक शक्तियां भी ऊर्जा के रूप में पूरे ब्रह्मांड में विचर रही हैं । उनका स्पष्ट कहना था की साधना से मिली हुई भक्ति की कृपा को ढोंग या किसी प्रकार के जादू टोने से तुलना करना गलत है । वह कभी भी किसी को उनके बारे में स्वयं नहीं बताते अर्जी लगाई जाने पर या पूछने पर ही बताते हैं। जो भी भक्त बालाजी दरबार से जुड़े हैं वह सच्ची आस्था रखते हैं और ईश्वर की शरण मैं स्वयं को समर्पित करते हैं कभी भी बागेश्वर धाम बालाजी ने या पंडित धीरेंद्र शास्त्री जी ने किसी को बाध्य नहीं किया है अपने धर्म को मानने एवम दरबार से जुड़ने के लिए । उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा ईश्वर की शक्ति को सभी मानते हैं उपासक भी मानते हैं और साधारण इंसान भी उनके दरबार से कई अन्य धर्म के लोग भी जुड़े हैं और वे सभी का सम्मान करते हैं सभी की अर्जियों को सुनते हैं । लोग बागेश्वर बालाजी धाम पर स्वयं ही लोग आते हैं । इसी प्रकार दरबार में बड़े-बड़े राजनेताओं से लेकर, कई बड़े लोगों की भीड़ बालाजी दरबार से जुड़ने के लिए ,आशीर्वाद कृपा प्राप्त करने के लिए स्वयं आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे सनातनी होने पर बस इतना ही कहेंगे कि हमें अपने सनातन धर्म की रक्षा करनी चाहिए और इसके लिए वे हमेशा तत्पर रहेंगे।
जय बागेश्वर बालाजी धाम की।

©®आशी प्रतिभा दुबे ( स्वतंत्र लेखिका)
ग्वालियर , मध्य प्रदेश
भारत

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