श्रीमदभागवत कथा का एक श्लोक सुरसरि के समान है – शिशिरकृष्ण महाराज

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राजापुर / चित्रकूट- राजापुर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत भभेट के मजरा बरौंधा में संगीतमय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के कथावाचक आचार्य पंडित श्री शिशिर कृष्ण जी महाराज ( सुधांशु ) द्वारा प्रथम दिन कलश यात्रा के साथ पूजा अर्चना कर 101 महिलाओं के साथ भव्य यात्रा निकाली गई।

कथा के प्रथम दिन श्रीमद्भागवत पुराण के महत्व की कथा करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत का एक श्लोक सूरसरि के समान है दुराचारी,पापाचारी की मृत आत्माओं के मोक्ष के लिये कथा का श्रवण ही उद्धार हैं जैसे ब्रह्मदेव नामक भक्त ब्राह्मण व पत्नी धुंधली निसंतान होने के कारण दुखी रहते थे।

ऋषि वरदान के कारण मा धुंधली की बहन से एक पुत्र धुंधकारी तथा गौ माता से वक पुत्र गोकर्ण का जन्म हुआ धुंधकारी नामक बालक आताताई, पापाचारी तथा दुराचारी होने के कारण अल्पायु में ही मृत्यु को प्राप्त कर लिया था लेकिन धर्मात्मा गोकर्ण ने मृत आत्मा के मोक्ष के लिए श्रीमद्भागवत पुराण की कथा को सुनाकर मोक्ष दिलवाया था।

कथावाचक में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूपो तथा बाल चरित्र की कथा कहते हुए बताया कि पूतना,बकासुर ,अघासुर जैसे राक्षसों का वधकर मोक्ष प्रदान किया था कथा के अंतिम दिन श्री कृष्ण और सुदामा के अटूट मित्रता की कथा करते हुए बताया कि त्रिलोक के स्वामी श्री कृष्ण गरीबी,अमीरी जाति भेदभाव को त्याग कर अपने बाल सखा सुदामा के चरणों को इस प्रकार से प्रेम विभोर होकर चरणों को पखारा कि यह ज्ञात नहीं हो पाया कि आंसुओं से या पानी से पैर पसार रहे हैं सुदामा की धर्म पत्नी द्वारा दिए गए तीन मुट्ठी तंदुल को भगवान श्री कृष्ण ने भक्ति भावना से ओतप्रोत होकर दो लोकों का स्वामी सुदामा जैसे दरिद्र ब्राह्मण को स्वामी बना दिया।

इस अवसर पर आयोजक रूप नारायण तिवारी पत्नी राजकुमारी , देवेंद्र तिवारी( बब्लू ) नरेंद्र तिवारी कौशल प्रसाद तिवारी समेत आदि लोग कथा श्रवण में मौजूद रहे ।