राजापुर में भारत बन्द का नहीं दिखा कोई असर,रोजाना से ज्यादा दिखी भीड़ और रोज की तरह खुली रही दुकानें

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तुलसी धाम राजापुर। चित्रकूट- केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरुद्ध देश का किसान लामबन्द होकर कृषि कानून को वापस लेने के लिए दिल्ली की सीमाओं में डटा हुआ है तथा 8दिसम्बर को भारत बन्द किसान संगठनों के आवाहन पर राजापुर तहसील क्षेत्र में कस्बा सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बन्द बेअसर रहा। कस्बे के प्रतिष्ठान सुबह से ही प्रतिदिन की भाँति खुली रहीं और ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों ने बन्द का विरोध भी किया।

बताते चलें कि भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के आवाहन किया पर 8दिसम्बर को भारत बन्द का ऐलान किया गया लेकिन राजापुर क्षेत्र में बन्द का कोई असर नहीं दिखाई पड़ा। तिरहार क्षेत्र के चिल्लीमल गाँव के वृहद काश्तकार करुणेश मिश्रा ने कहा कि भारत सरकार द्वारा लाए गए किसान बिल में किसानों के अनहित में कोई भी कानून नहीं बनाया गया तथा कुछ किसान गुट के संगठनों ने निहित स्वार्थ के लिए किसानों को मोहरा बनाकर यह आन्दोलन किया जा रहा है।

जबकि भारतवर्ष कृषि प्रधान देश है, यहाँ 70प्रतिशत आबादी गाँव में किसान के रूप में निवास करते हैं जो अपने स्थानीय बाजार में अपने उत्पाद को बेंचकर सन्तुष्ट रहते हैं तथा केंद्र सरकार द्वारा जारी समर्थन मूल्य के आधार पर सरकारी क्रय केन्द्रों में अपना धान , गेंहूं बेंचते हैं।

जिससे किसानों को अच्छा मूल्य प्राप्त होता है। तिरहार क्षेत्र के तमाम किसानों से जब बात – चीत की गई तो लोगों ने बताया कि किसान आन्दोलन पंजाब के वर्तमान मुख्यमंत्री के द्वारा राजनैतिक बनाकर किसानों को मोहरा बनाया जा रहा है। जबकि भारत सरकार द्वारा लाए गए तीनों को किसान बिल किसानों के हित को देखते हुए टैक्स मुक्त किया गया है और स्वतंत्रता के आधार पर किसान अपने उत्पाद को भारत के किसी भी मण्डी में बेंचने के लिए स्वतंत्र कर दिया गया है।

जिससे किसान की आय दुगनी होगी और उत्पाद का सही मूल्य किसान प्राप्त करते हुए दलालों , बिचौलियों एवं मण्डी समितियों के अफसरशाही से बचा रहेगा। स्पष्ट दिख रहा है कि कुछ शरारती तत्वों एवं विपक्षी दलों के द्वारा किसानों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर अराजकता का माहौल पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है तथा किसानों को इस बात को समझना होगा कि इस अराजकता का खामयाजा समाज एवं देश पर दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं।

भारत सरकार द्वारा लाए गए तीनों कृषि बिल क्षेत्र में रोजगार की नई सम्भावनाओं के द्वार खोलेगी। नए कृषि कानूनों द्वारा राष्ट्रीय कृषि बाजार के निर्माण का सीधा लाभ सीमान्त , छोटे व मझोले किसानों को मिलेगा। सूबे के विपक्षी दल जिस तरह से कृषि कानूनों को लेकर दोहरे आचरण का परिचय दे रहे हैं उसे देखते हुए यह आवश्यक हो जाता है कि केंद्र सरकार पूरी गम्भीरता के साथ इन विपक्षियों के रवैय्ये को बेनकाब करे।

तिरहार क्षेत्र के वृहद, सीमान्त एवं लघु किसानों में अशोक चतुर्वेदी हस्ता, संजय उपाध्याय, राजेश द्विवेदी, आदित्य मिश्रा, हरिश्चन्द्र मिश्रा नैनी तथा देव त्रिपाठी, भोला त्रिपाठी सुरवल, कमलेश कुमार पाण्डेय कनकोटा, शिवमोहन कनकोटा, धीरेन्द्र सिंह बेराऊर, रमेश तिवारी, रमेश मिश्रा, वेदप्रकाश मिश्र, नरेन्द्र कुमार त्रिपाठी सुरसेन गाँव के तमाम किसानों ने 8दिसम्बर को भारत बन्द की घोर निंदा करते हुए आंदोलन स्वार्थी संगठनों के द्वारा किसानों के नाम पर राजनैतिककरण करके अच्छा काम कर रही केंद्र सरकार को बदनाम करने पर तुले हुए हैं, इस क्षेत्र का कोई भी किसान आन्दोलन बन्द का समर्थन नहीं करेगा यह किसान आन्दोलन न होकर विपक्षी आन्दोलन है।