“आहट” – अध्यापक उमेश सिंह

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कैसी यह उदासी छाई है ?

कहाँ से यह विरानगी आई है ?
दिल कुछ कहना चाहता है,
पर लबों पर खामोशी छाई है ,

गुलज़ार रहते थे जो शहर कल तक,
उसमें खालीपन की बयार आयी है ।
हौसलों की उड़ान पर जो उड़ा करते थे,
आज उन्हें जमीं पर मिल रही रुशवाई है ।

अपनों का दामन जो छोड़ गए थे,
आज उन्हें अपनों की याद आयी है ।
गुरुर के आशियाँ में जो जिया करते थे,
आज शराफत की झोपड़ी बनायी है ।
कुदरत को नजरअंदाज करनेवाले,
उसके हिफ़ाजत की दे रहे दुहाई है ।

इतना गुरुर में ना रहा करो इंसानों,
उसकी लाठी से कभी आवाज नहीं आयी है ।
वक़्त है, अभी भी संभल जाओ,
विनाश की आहट अब आई है ।।।।

उमेश सिंह
जवाहर नवोदय विद्यालय, सोनभद्र