जल संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का व्रत बंधन जरूरी- गिरीश गौतम

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जल संरक्षण के लिए वृक्षारोपण का व्रत बंधन जरूरी- गिरीश गौतम

– तकनीकी सत्र में रखे विचार

चित्रकूट ब्यूरो: दीनदयाल शोध संस्थान के उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों पर चल रहे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन शनिवार को साफ पानी और स्वच्छता पर आयोजित तकनीकी सत्र में मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष गिरीश गौतम सहित अन्य लोगों ने विचार रखे।
सत्र में विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम ने कहा कि जल की स्वच्छता पर चचार् हो रही है। इस बारे में सबसे पहले हमारे ऋषि-मुनियों ने इस पर चचार् की है। हमारे पूवर्ज हर गांव में तालाब, कुआ, बावड़ी आदि बनवाने के पक्षधर थे। हिंदू विवाह में सात फेरे होते हैं अथार्त पांचवें फेरे का पांचवा वचन जल पर है। रीवा राज्य के अंदर 2100 तालाब थे, जो अब 700 बचे हैं। ऐसा रीवा रियासत के कानून में जिक्र है। मेघालय की उमंगगोट नदी दुनिया की सबसे स्वच्छ नदी है। इस नदी के किनारे खासी जनजाति बसी है, अनपढ़ होने के बावजूद उन्हें नदी स्वच्छता की अच्छी समझ है। पानी के दुरुपयोग को रोकना जरूरी है, पानी प्रकृति की संरचना के भीतर से ही आएगा। केवल एक प्रतिशतः पानी दुनिया की 7.5 अरब आबादी का पोषण कर रहा है। हमने पानी बचाने के लिए ज्यादा कायर् नहीं किया है। पहले हम बगीचा लगाते थे, अब हम पेड़ लगाते हैं, जिसका व्रत बंधन भी ठीक ढंग से नहीं करते हैं, जो कि जल संरक्षण का आधार है। यूएनडीपी के डॉ रमेश जालान ने कहा कि स्वच्छ जल तो दूर की बात है हमे पहले पानी की उपलब्धता के बारे में सोचना होगा। क्योंकि जब पानी होगा, तब उसकी सफाई की बात होगी। जब तक पानी से कूड़ा कचरा नहीं निकलेगा, तब तक पानी नहीं मिलेगा। स्वच्छ पानी की कमी महसूस की जा रही है। इससे फसल उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ेगा। किसानों की आथिर्क विकास की स्थिति तभी सुधरेगी, जब पानी की उपलब्धता बढ़ेगी। पानी शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी और रोजगार से जुड़ा विषय है। पानी की उपलब्धता और स्वच्छता समाज जीवन का आधार है। जलवायु परिवतर्न के कारण अनेक समस्याएं बढ़ी है, जिसमें से पानी की समस्या एक है। जल के प्रयोग को बढ़ाना होगा, गुड वाटर गवनेंर्स पर ध्यान देना होगा। अटारी के निदेशक डॉ एस आर के सिंह ने कहा कि जल है, तो कल है। दुनिया में 97 प्रतिशत जल खारा जल है। जबकि तीन प्रतिशत मीठा उपयोग योग्य जल है। एक तिहाई ग्राउंड वाटर है, शेष नदियों एवं ग्लेशियर में है। बाजार से जब हम 20 रुपये की एक पानी की बोतल खरीदते हैं, तब हमें स्वच्छ जल का पता चलता है। जल का संग्रहण, जल प्रबंधन की तकनीकी में सुधार करें इसमें नवाचार लाएं। डीआरआई के प्रधान सचिव अतुल जैन ने कहा कि हर जगह का टीडीएस अलग होता है। न्यूयॉकर् से पैरामीटर तय होकर आ जाते हैं, लेकिन उसे अपने देश के हिसाब से देखना चाहिए। नानाजी देशमुख एवं पं दीनदयाल उपाध्याय विकेंद्रीकरण के पक्षधर थे। लोक परंपराओं में और लोकगीतों में पानी बचाने का सूत्र रहता है।
इस मौके पर इंडियन सोसाइटी आफ एग्रीकल्चरल इकोनोमिक्स के अध्यक्ष डॉ दिनेश कुमार मरोठिया, स्कॉलर वाटर टेस्टिंग अजय कुमार अनुरागी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।

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