श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भीष्म पितामह, भगवान श्री राम जन्म और श्री कृष्ण की कथा सुन भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु ।।

श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन भीष्म पितामह, भगवान श्री राम जन्म और श्री कृष्ण की कथा सुन भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु ।।

रामपुरा (जालौन):-नगर के कालिका देवी ग्राउंड में शुक्रवार से सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा की शुरुआत की गई हैं।

आचार्य अरुण मिश्रा जी महाराज के द्वारा कथा के चौथे दिन श्रोताओं को दो कथाएं सुनाकर भावविभोर कर दिया। कथा के चौथे दिन भीष्म पितामह का प्रसंग सुनाया। उस दौरान मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ रही। सभी भक्तों ने कथा का रसास्वादन किया। श्रीमद्भागवत कथा की मनमोहक प्रसंग का वर्णन करते हुए कथा में बताया कि असत्य से सत्य की ओर , अंधकार से प्रकाश की ओर , पाप से पुण्य की ओर भगवान का भजन हम सभी को करना अनिवार्य है। श्रीमद् भागवत कथा अनंत है।
भगवताचार्य अरुण मिश्रा ने महाभारत के भीष्म की कथा सुनाते हुए कहा कि भीष्म पितामह जब बाणों की शैया पर लेटे हुए जीवन और मृत्यु के बीच तड़प रहे थे। तब उन्हें उम्मीद थी कि प्रभु श्री कृष्ण उनसे मिलने जरूर आएंगे। भीष्म पितामह बाणों की शैया पर तड़पते हुए लगातार श्री कृष्ण की राह देख रहे थे और उनके आने की उम्मीद कर रहे थे। हालांकि जब भीष्म पितामह की उम्मीद टूट गई और उन्हें लगा कि अब भगवान श्री कृष्ण उनको दर्शन नहीं देंगे, तभी प्रभु ने भीष्म पितामह को दर्शन दिए। तब भीष्म पितामह ने पूछा कि प्रभु मैंने कभी किसी का कुछ नहीं बिगड़ा, किसी के साथ गलत नहीं किया फिर आखिर मुझे इतना कष्ट क्यों? तब भगवान श्रीकृष्ण भीष्म पितामह को 100 साल पीछे ले गए और दिखाया कि किस तरह भीष्म पितामह एक रथ पर है और उस दौरान वह एक मूर्छित सांप को कांटों भरी झाड़ियों में फेंक कर जा रहे। उस दौरान वो मूर्छित सांप कांटों की झाड़ियों पर तड़प तड़प कर मर रहा था तब सांप ने भीष्म पितामह को श्राप दिया कि जिस तरह मैं कांटो की झाड़ियों पर तड़प तड़प कर मर रहा हूं ठीक उसी तरह भीष्म पितामह की भी मौत होगी।
उक्त मौके पर भागवताचार्य अरुण मिश्रा, परीक्षित उषा देवी पत्नी शिवपाल सिंह सेंगर,अजय राजावत सहित सैकड़ों श्रोता एवम समस्त खाई मोहल्ला वासी मौजूद रहे।