ऐतिहासिक आपदा

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आज संपूर्ण विश्व की मानव जाति एक ऐसी आपदा से ग्रसित हो गई है, जिसको या तो लोगों ने किताबों में पड़ा या फिल्मों में देखा है। आज दुनिया जिस आपदा से ग्रसित है वह रील पर नहीं चल रहा है, रियल में चल रहा है। आप लोग समझ गए होंगे कि मैं किस विषय पर बात कर रहा हूं, जी हां “Covid-19”

किसी अन्य लेख में चर्चा करूंगा कि किसने फैलाया क्यों फैलाया क्या उद्देश्य है, आज मैं सिर्फ भारतीय स्थिति पर चर्चा करूंगा। भारत के संदर्भ में “Covid-19” पर बात की जाए तो स्थिति अभी नियंत्रण में है। निजामुद्दीन की घटना ने सभी सरकारों के साथ आम जन की परेशानी पर बल डाल दिया है, फिर भी हमारे वीर योद्धा स्थिति को नियंत्रण में कर रहे हैं। देश का एक सजग नागरिक होने के नाते हम सभी भारतीयों को माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा लागू 21 दिन के संपूर्ण लॉकडॉउन को संपूर्ण दृढ़ता एवं इच्छाशक्ति से पालन करना है। सामाजिक दूरी बनाकर रखें, नियमित हाथ धोएं, योगाभ्यास करें, किसी बाहरी वस्तु को छूने पर अपने हाथ, नाक, आंख और मुंह को न लगाएं। आपके आस पास कोई व्यक्ति बाहर से आया हो, तो उसे 14 दिन तक Quarantine में रखें, साथ में याद रखें कि उससे सभी लोग अच्छा व्यवहार करें।

इस महामारी की एकमात्र दवा हैं बचाव, और सिर्फ बचाव, दुनिया के समृद्ध देशों ने इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया है, उसका परिणाम हम लोग देख रहे हैं। जबकि उनकी जनसंख्या हमसे काफी कम है स्वास्थ्य और आर्थिक क्षेत्र में ये सारे देश हमसे काफी आगे हैं। फिर भी आज बेदम है, इसका एकमात्र कारण लापरवाही है।
जरा सोचिए हम स्वास्थ्य सुविधाओं और आर्थिक मोर्चे पर कहां है। उन समृद्ध देश की जनता की तरह यदि हम लोग भी लापरवाही करेंगे तो कल्पना करके देखिए कि देश की स्थिति कितनी भयानक होगी।
इस देश को जब-जब जरूरत पड़ी है तब-तब देश की जनता ने एक साथ कदम से कदम मिलाकर साथ दिया है। आज फिर वही जरूरत आन पड़ी है या यूं कहे की ज्यादा जरूरत आन पड़ी है। मानव जाति के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है कि सहयोग के नाम पर कुछ करने की जरूरत नहीं है बस घर पर रहना है, कुछ करके देश को नहीं बचाना है बल्कि घर पर रहकर कुछ ना करके (इसका अर्थ बाहर न जाने से है) देश को बचाना है।
हम लोग यह सुनते रहते हैं कि “लक्ष्य जितना बड़ा होगा, संघर्ष उतना ही तगड़ा होगा”। अब तक सुने थे हम लोग अब करके दिखाना है। घर पर रहिए सुरक्षित रहिए और इस गाने को गुनगुनाते रहिए—
“जिंदगी हर कदम एक नई जंग है-2
जीत जाएंगे हम, जीत जाएंगे हम तू अगर संग है—

                     जय हिंद

उमेश कुमार सिंह
अध्यापक
जवाहर नवोदय विद्यालय, बहुआर सोनभद्र, (उत्तर प्रदेश)