जगम्मनपुर राज्य का ऐतिहासिक सागर कुआं जर्जर हो नष्ट होने की कगार पर

जगम्मनपुर राज्य का ऐतिहासिक सागर कुआं जर्जर हो नष्ट होने की कगार पर

 

जगम्मनपुर, जालौन। देशी रियासत काल के जगम्मनपुर राज्य का ऐतिहासिक विशाल सागर कुंआ राज वंशजों के उत्तराधिकारियों एवं स्थानीय पंचायत के अब तक हुए प्रधानों की अनदेखी का शिकार हो नष्ट होने की कगार पर है ।
माधौगढ़ तहसील अंतर्गत ग्राम जगम्मनपुर राजमहल के सामने लगभग सवा चार सौ वर्ष पहले निर्मित विशाल कुंआ जिसे सागर के नाम से जाना पहचाना जाता है जीर्ण शीर्ण हो नष्ट होने की कगार पर है । किवदंती है कि सन् 16 सौ शताब्दी के अंतिम समय में जब जगम्मनपुर के राजमहल का निर्माण हो रहा था उस समय जगम्मनपुर में तत्कालीन महाराजा जगम्मनदेव के अनुरोध पर गोस्वामी तुलसीदास जी पधारे और उन्होंने अपने हाथों से नवनिर्मित किला की देहरी रोपित कर राजा जगम्मनदेव को एक मुखी रुद्राक्ष, भगवान शालिग्राम की मूर्ति व दाहिना वर्ती शंख भेंट किया । उस दौरान जगम्मनपुर गांव की स्थापना हो रही थी अपने नव स्थापित नगर की प्रजा के लिए जलापूर्ति की चिंता तत्कालीन राजा के मन में थी उन्होंने महात्मा तुलसीदास जी से कुआं खोदने के लिए स्थान चयन करने का अनुरोध किया तो उन्होंने किला के उत्तरी भाग में कुआं निर्माण करने को कहा राजाज्ञा से कुआं खोदा जा रहा था लेकिन उसने पानी ना निकलने पर राजा ने चिंता व्यक्त की । राजा जगम्मनदेव की चिंता देख गोस्वामी तुलसीदासजी जी के समीप विराजमान पंचनद स्थित आश्रम के सिद्ध संत श्री मुकुंदवन (बाबा साहब) महाराज ने अपने कमंडल से उस सूखे कुआं में जल डाला ऐसा करते ही वहां से जलधारा फूट पड़ी और कुआं के ऊपर जल प्रवाहित होने लगा यह देख राजा परेशान हुए और उन्होंने तत्काल पत्थर और चूना कुआं में डलवा कर नीचे के जल स्रोतों को रोका तब संतो (गोस्वामी तुलसीदास जी एवं महाराज मुकुंदवन बाबा साहब) ने इस कुआं को सागर नाम से संबोधित करते हुए कहा कि यह कुआं पवित्र नदियों के जल स्रोतों से संपर्क में है इस जल के स्नान करने से सभी तीर्थों के स्नान का पुण्य लाभ होगा।
ज्ञात हो कि जगम्मनपुर में प्रत्येक गांव में 100 फुट की गहराई पर ही पानी है लेकिन जगम्मनपुर के सागर कूप में मात्र 55-60 फुट पर अपार जल है । बगैर बोरिंग के इस सागर कुआं के जल से राजा के 32 बीघा नजरबाग की सिंचाई नलकूप से होती रही है । आठ घाट वाला यह विशाल कुआं जल से तो अभी भी लबालब है किंतु लगभग 50 वर्षों से सफाई ना होने एवं राजवंशों के द्वारा अथवा स्थानीय ग्राम पंचायतों के निर्वाचित प्रधानों के द्वारा उसका का रखरखाव ना होने से यह ऐतिहासिक धरोहर अब जीर्ण शीर्ण होकर अब खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है ।

मान्यता है कि इस कुएं में पंचनद का पवित्र जल स्रोत है । इसके जल से स्नान करने से तीर्थों में स्नान करने का पुण्य प्राप्त होता है । *बाबूराम द्विवेदी जगम्मनपुर*

जगम्मनपुर का प्राचीन सागरकूप असीमित जल का स्रोत है इसे संरक्षित कर भविष्य की संभावित पेयजल समस्या से बचा जा सकता है । राघवेंद्र पांडे प्रतिनिधि जिला पंचायत जगम्मनपुर

सागरकूप संतों द्वारा आशीर्वाद स्वरूप प्रदान किया गया है , यह हमारे पूर्वजों की ऐतिहासिक धरोहर है। यदि पंचायत या सरकारी व्यवस्था से इसका संरक्षण किया जाता है तो स्वागत है अन्यथा इसका जीर्णोद्धार मेरे द्वारा कराया जाएगा । *राजा सुक्रत शाह राजवंशज

 

खबर लेखक – पत्रकार विजय द्विवेदी