सूची में नाम पहले नंबर पर लेकिन रह रहे झोपड़ी में

सूची में नाम पहले नंबर पर लेकिन रह रहे झोपड़ी में

मैनपुरी:जागीर ब्लाक के ग्राम एलाऊ,,,, गांवों में सरकारी योजनाओं का लाभ प्रधान और सचिव की कृपा से मिलता है। दोनों की कृपा के बिना किसी योजना का लाभ पात्र होने के बाद भी मिलता है। योजना का लाभ अपात्रों को तो वोट और लक्ष्मी की मेहरबानी से मिल जाता हैं, जबकि पात्रों को इसके लिए सालों चक्कर लगाने पड़ते हैं।
कुछ ऐसा ही मामला विकासखंड जागीर क्षेत्र के गांव एलाऊ निवासी रेनू देवी पत्नी जयवीर भुर्जी से जुड़ा है। पात्र होने और सूची में पहला नाम होने के बाद भी यह गरीब महिला को पीएम आवास का लाभ नहीं मिल सका है। आज भी आवास से वंचित यह परिवार कच्चे गिरासू मकान में झोपड़ी डालकर जीवनयापन कर रहा है। बीते पांच वर्ष में पात्र महिला के पति जयवीर ने आवास पाने के लिए ब्लाक कार्यालय, ग्राम प्रधान और सचिव के अनगिनत चक्कर काटे, लेकिन आवास नहीं मिल सका। बीस हजार मांगने का आरोप
आवास सूची में रेनू देवी का नाम प्रथम स्थान पर था, लेकिन ग्राम प्रधान और सचिव की मनमानी के कारण आवास नहीं मिल सका। पीड़ित का आरोप है कि ग्राम पंचायत में जिन लोगों ने बीस-बीस हजार रुपये दे दिए थे, उन्हें ही आवास योजना का लाभ मिल सका। वह परिवार का भरण पोषण मजदूरी करके करता है, 20 हजार रुपये जुटाना मुश्किल कार्य है, इसलिए नहीं मिल सका। रात को जान का खतरा
जयवीर ने बताया कि गिरासू कच्चे मकान की दीवार अब बारिश में गिरने का डर सताता है। कहीं किसी दिन कोई हादसा न हो जाए। झोपड़ी पर पालीथिन डालकर पत्नी और तीन बच्चों के साथ जीवन बसर हो रहा है। अथक प्रयासों के बाद भी आवास नहीं मिला तो घर बैठ गए। उसका कहना है कि उसके पास एक इंच भी जमीन नहीं है। शादी समारोह में हलवाई और टेंट हाउस वाले के साथ मजदूरी का कार्य करते हैं, बमुश्किल तीन सौ रूपये मिल पाते हैं, उससे ही परिवार का गुजारा चलता है। लाकडाउन के दौरान शादी समारोह कार्यक्रम बंद हो गए थे तो भरण पोषण के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। डीलर नहीं देता राशन
जयवीर ने बताया कि उसने तीन वर्ष पूर्व राशन कार्ड बनवाया था, लेकिन राशन आज तक नहीं मिला। डीलर कहता है कि तुम्हारा राशन कार्ड सूची में नाम कट गया है, इसलिए राशन नहीं मिलेगा। जबकि आनलाइन सूची में राशन कार्ड पत्नी के नाम दर्ज है। गेहूं और चावल परिवार पालन के लिए खरीद कर ही लेने पड़ते हैं।