गुरुकुल संकुल में चल रहे सात दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का हुआ समापन

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गुरुकुल संकुल में चल रहे सात दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का हुआ समापन

शिविर से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिवषर् तैयार हो रहे हैं बाल मित्र

– 79 गांव के 175 बच्चों ने किया सहजीवन का अभ्यास

चित्रकूट ब्यूरो: दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के गुरुकुल संकुल सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय के शैक्षणिक परिसर में बच्चों को बहुआयामी बनाने के लिए आयोजित सात दिवसीय व्यक्तित्व विकास शिविर का समापन बुधवार को किया गया। जिसमें मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के 79 गाँवों से 105 बालक एवं 70 बालिकाएं इस शिविर में सहभागी हुए हैं। ग्रीष्मावकाश में लगने वाले इस शिविर में गांव के बच्चों के साथ-साथ आसपास के विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चे भी हिस्सा लिए। पूणर्तः आवासीय सुविधा के साथ लगने वाले इस शिविर में उन्हें पीटी, योगचाप, डंवल, लेजिम, ढोलक, तबला, हारमोनियम, प्राणायाम, सूयर् नमस्कार के साथ कंप्यूटर प्रशिक्षण, चित्रकला, गीत-वादन आदि कई विधाओं में पारंगत एवं स्थानीय अंचल व दूरदराज के क्षेत्रों से आए कुशल प्रशिक्षित प्रशिक्षकों द्वारा इन्हें प्रशिक्षण दिया गया।
शिविराधिकारी समाजशिल्पी दंपत्ति वीरेन्द्र चतुवेर्दी एवं छाया चतुवेर्दी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों के सवांर्गीण विकास की दृष्टि से वषर् 2001 से भारतरत्न नानाजी देशमुख द्वारा शुरू कराए गए इस शिविर के माध्यम से बच्चे कुशल प्रशिक्षकों के मागर्दशर्न में विविध कलाओं में दक्ष होकर शिविर से जाने के बाद अपने गांव एवं आसपास के बच्चों को इस शिविर में सीखें विविध कलाओं का प्रशिक्षण देते हैं। इस तरह से अनेक बाल मित्र प्रतिवषर् तैयार हो रहे हैं। शिविर संयोजक डाॅ अशोक तिवारी ने बताया कि चित्रकूट क्षेत्र में नयी पीढ़ी को गढ़ने का यह अभिनव 22वां आयोजन है। इन शिविरों का प्रभाव यह देखने को मिल रहा है कि आज गाँव गाँव में प्रशिक्षण देने और ग्राम स्तर पर बाल संस्कार केंद्र आयोजित करने के लिये अच्छी संख्या में ग्रामीण बालक बालिका तैयार हो रहे है। शिविर में विभिन्न ग्रामों, नगरों और विभिन्न सामाजिक आथिर्क स्तरों के बालक बालिकाओं ने एक साथ सहजीवन का अभ्यास किया। शिविराथिर्यों ने व्यक्तित्व विकास के विविध आयामों को हंसते खेलते सहजता और सरलता से सीखा और समझा है। शिविर में प्रतिदिन प्रातः पांच बजे से रात्रि 10 बजे तक के दिनकम में शिविराथिर्यों ने 07 दिवस विविध प्रशिक्षण प्राप्त किये है। प्रातः प्राथर्ना के कालांश में अलग अलग स्थानों में वणिर्त नदियाँ पहाड धामिर्क स्थल एवं महापुरुषों के बारे में बताया गया। शिविर में शारीरिक एवं बौद्धिक कायर्क्रमों के साथ साथ अलग अलग प्रकार के विषयों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण शिविराथिर्यों ने अलग अलग समूहों में प्राप्त किया। हारमोनियम, ढोलक, तबला, गायन, नृत्य, चित्रकला, अंग्रेजी संभाषण और कम्प्यूटर का प्रशिक्षण प्राप्त किया। शिविर के बौद्धिक सत्र में प्रतिदिन अलग अलग व्यवहारिक प्रयोगात्मक विषयों पर विषय विशेषज्ञों द्वारा ज्ञानवधर्न किया गया। शारीरिक प्रशिक्षण के अन्तगर्त डम्बल, लेजिम, योग दण्ड योग एवं नियुद्ध का प्रशिक्षण दिया गया। रात्रिकालीन कायर्क्रम के मनोरंजन सत्र में बालक बालिकाओं की उत्साहपूणर् सहभागिता देखने को मिली। इस दौरान विभिन्न प्रतियोगितायें भी करायी गयी। शिविर के दौरान दीनदयाल शोध संस्थान के विभिन्न प्रकल्पों के कायर्कतार्ओं का अच्छा सहयोग प्राप्त हुआ। जिनके अथक प्रयासों से कम समयावधि में बच्चे अधिक विधाओं को सीख सकें। शिविर के बौद्धिक सत्र में मदनगोपाल दास महाराज, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रान्त सेवा प्रमुख सुरेन्द्र, ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर भरत मिश्रा, प्रोफेसर अमरजीत सिंह, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खंड कायर्वाह सुशील मिश्रा, सह विभाग कायर्वाह सतना लक्ष्मीकान्त, संस्थान के वरिष्ठ कायर्कतार् पद्माकर मालवीय एवं संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन का मागर्दशर्न प्राप्त हुआ।

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